सोमवार, 17 जून 2024

अनियमितताओं की वेदी पर युवाओं का भविष्य

 



युवा राष्ट्र के मेरुदंड हैं । राष्ट्र  की समृद्धि में युवाओं की ही महत्ती भूमिका है  । युवाओं की सक्रिय सहभागिता ने आजादी के आंदोलन से लेकर सम्पूर्ण क्रांति और समसामयिक अनेक आंदोलनों की पृष्ठभूमि तैयार करने और  जनतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन में  एक उल्लेखनीय भूमिका निभाई है । बीते वर्ष यही युवा वर्ग उत्तराखंड में पेपर लीक प्रकरणों के विरुद्ध मुखर हुआ था, कुछ माह पूर्व यही युवा वर्ग लखनऊ में उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर परीक्षा धांधली के विरोध में अपने अधिकारों के लिए मुखर हो रहा था। ज्यादा समय नहीं बीता है जब यही युवा बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के लिए भी मुखरित हुआ था । व्यापम घोटाले के सामने आने पर भी यही युवा मुखरित हुआ था और आज फिर से भारत में प्रतिवर्ष सबसे ज्यादा उम्मीदवार जिस परीक्षा में बैठते है उस  नीट ( यूजी) के संदर्भ में भी यही परिस्थितियां  निर्मित हो रही  हैं , लेकिन इन सबके बीच एक सकारात्मक बात यह है कि वर्तमान भारत के युवाओं ने प्रतिरोध के रास्तों को बखूबी समझा है  और आज का युवा सड़कों में हल्लाबोल और विरोध प्रदर्शन  से अधिक अदालती कार्यवाही के माध्यम से न्याय की तरफ आगे बढ़ता दिख रहा है।

 नीट (यूजी) परीक्षा 2024 विषयक अनियमितताएं 

 

देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा एनईईटी-यूजी परीक्षा आयोजित की जाती है। इस वर्ष लगभग 4750 सेंटर्स में 23 लाख बच्चे मेडिकल क्षेत्र में जाने के लिए इस परीक्षा में उपस्थित हुए । इस परीक्षा का परिणाम वैसे तो 14 जून को प्रस्तावित था लेकिन जब पूरा देश चुनावों के रुझानों को देखने में व्यस्त था उसी समय इस परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। परीक्षा परिणामों में अनियमितताएं देखी गई। प्रतिरोध के स्वरों को पहले तो अनुसुना ही कर दिया गया ,लेकिन आज यह मामला उच्चतम न्यायालय में पहुंच चुका है। विभिन्न उच्च न्यायालयों में अनेक रिट इस संदर्भ में दायर ही चुकी हैं । इस संदर्भ में निम्नलिखित अनियमितताएं देखी जा रही हैं ।

 

1.नीट के प्रश्न पत्र में 180 प्रश्न होते हैं, जिसमें एक प्रश्न के लिए प्रत्येक सही उत्तर का भार 4 अंक होता है, इसलिए कुल अंक 720 होते हैं। गलत उत्तरों के लिए 4 अंक काट लिए जाते हैं।  नीट परीक्षा के  परिणाम आने के बाद यह देखने को मिला कि कुछ बच्चों को 720 में से 718 और 719 नंबर मिले हैं जो कि किसी भी तरह संभव नहीं है और इन्हीं पर सवाल उठने के बाद एनटीए ने ग्रेस मार्क्स देने की बात मानी थी । बिना किसी पूर्व सूचना के ग्रेस मार्क्स देने की यह परंपरा अपने आप में ऐतिहासिक थी । अभी तक प्राप्त सूचना अनुसार नीट परीक्षा में बैठने वाले 1563 छात्रों को इस बार ग्रेस मार्क्स मिले है । एनटीए पर जब सवाल उठे तो उसने यह माना कि इस बार उसने छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए हैं क्योंकि कई जगह एग्जाम देरी से शुरू हुआ था।

जब यह मामला  सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो एनटीए ने यह मान लिया कि ग्रेस मार्क्स देना गलत था ।

 

2. पहले यह विवाद केवल ग्रेस मार्क्स प्रदान करने तक सीमित था लेकिन  बिहार और गुजरात पुलिस ने शानदार कार्य करते हुए एक ऐसे घोटाले का खुलासा किया जिसके कारण आज पेपर लीक की संभावनाओं को भी बल मिला है ।  बीते 5 मई को पटना पुलिस ने एक ऐसा गैंग पकड़ा, जिसने स्वीकारा है कि कई छात्रों को एक रात पहले ही एग्जाम पेपर सॉल्व करवाया था । हाल के दिनों में बिहार पुलिस की  आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने छह पोस्ट-डेटेड चेक भी बरामद किए हैं, जिनके बारे में संदेह है कि ये चेक माफिया के पक्ष में जारी किए गए थे । पूछताछ में बच्चों द्वारा यह भी स्वीकारा गया की उनके अभिभावकों ने मोटी कीमत इसके लिए चुकाई है ।

 

3. तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु सेंटर हाईजैकिंग का है । इस वर्ष कुल 67 बच्चों के 720 में से 720 अंक आए हैं । आज तक के मेडिकल परीक्षा के इतिहास में यह पहला ऐसा क्षण है। हरियाणा के बहादुरगढ़ में स्थित हरदयाल पब्लिक स्कूल में 6 बच्चों को  720 में से 720 अंक प्राप्त हुए हैं। ये ऐसे बच्चे हैं जिनको परीक्षा व्यवस्थाओं में कमी के चलते ग्रेस मार्क्स दिए गए । एक ही सेंटर और उसमें भी एक ही कक्षा से इस तरह का परिणाम अप्रत्याशित है वहीं  गुजरात के गोधरा के जलाराम स्कूल में नीट का एग्जामिनेशन सेंटर में  30 छात्रों को गलत तरीके से एग्जाम दिलवाने के आरोप सिद्ध होते जा रहे हैं।  खास बात यह है कि इस सेंटर में गुजरात के लोकल स्टूडेंट्स के अलावा  महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से भी स्टूडेंट्स आए थे । अपने प्रदेश को छोड़कर गुजरात के गोधरा के इस सेंटर में जाकर परीक्षा देने की बात भी संदेह पैदा करने वाली है ।

 

भारत में विगत एक दशक में अनियमितताएं /पेपर लीक प्रकरणों का इतिहास

भारत में ऐसा नहीं है कि इस तरह की  घटनाएं पहली बार सामने आ रही हैं । अतीत के कड़वे अनुभवों ने हमें बताया है कि स्कूली शिक्षा से लेकर, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में किस तरह अनियमितताएं और विशेषकर पेपर लीक प्रकरण पूरे देश में  घटित हुए हैं। शिथिल कानूनों ने अंतर्राज्यीय गिरोहों को और भी सक्रिय करने में अहम भूमिका निभाई है। विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में विगत वर्षों के कुछ कड़वे अनुभव निम्नलिखित हैं।

विद्यालयी शिक्षा और अनियमितताएं

 

अक्टूबर 2014 में, पेपर लीक की रिपोर्ट सामने आने के बाद महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (एचएससी) परीक्षा का भौतिकी का पेपर रद्द करना पड़ा। बोर्ड ने परीक्षा को बाद की तारीख के लिए पुनर्निर्धारित किया । अप्रैल 2016 में, कर्नाटक माध्यमिक शिक्षा परीक्षा बोर्ड (केएसईईबी) ने पेपर लीक की रिपोर्ट सामने आने के बाद  विज्ञान का पेपर रद्द कर दिया।

मार्च 2017 में, बड़े पैमाने पर नकल और पेपर लीक की रिपोर्ट के बाद बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने कला, विज्ञान और वाणिज्य स्ट्रीम के लिए इंटरमीडिएट परीक्षा रद्द कर दी।  वर्ष 2018 में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की अर्थशास्त्र परीक्षा के दौरान एक पेपर लीक की सूचना मिली थी, जिससे देश भर में 15 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए थे। वर्ष 2019 में, सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र लीक होने के कारण नागालैंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (एनबीएसई) को अंग्रेजी और वैकल्पिक अंग्रेजी के लिए कक्षा 12 की परीक्षा बीच में ही रद्द करनी पड़ी थी।

 

प्रतियोगी परीक्षाएं और अनियमितताएं

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूरे देश में रिकार्ड अनियमितताएं देखने को मिलती हैं । वर्ष 2013 में एसएससी पेपर लीक प्रकरण के कारण परीक्षा को ही निरस्त कर दिया गया था। वर्ष 2014 में , मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर पेपर लीक की सूचना मिली थी । वर्ष 2015 में, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड परीक्षा के दौरान  पेपर लीक की सूचना मिली थी, जिसके कारण परीक्षा रद्द कर दी गई और परीक्षा को पुनर्निर्धारित किया गया।  वर्ष 2015 में, असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) पेपर लीक प्रकरण सामने आया था । वर्ष 2016 में, नागालैंड सिविल सेवा परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ, जिसके कारण व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ और दोबारा परीक्षा की मांग की गई।  फरवरी 2018 में, कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों से हिल गया था,  विवाद के कारण अंततः परीक्षा रद्द कर दी गई और पुनर्निर्धारित की गई । सितंबर 2018 में, पेपर लीक की रिपोर्ट के बाद तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड  ने कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा रद्द कर दी।

 दिसंबर 2018 में ही  पेपर लीक की रिपोर्ट के बाद हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा रद्द कर दी। मार्च 2018 में, कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने पेपर लीक और ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ियों की रिपोर्ट के बाद संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) की टियर- I परीक्षा रद्द कर दी थी।

उत्तराखंड में तो एक पूरी श्रृंखला पेपर लीक प्रकरणों से संबंधित हमारे सामने आई। ऐसे अनेकों उद्धरण शोध करने पर हमको अभी और मिल सकते हैं जिन्होंने युवाओं की मानसिक,आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर  कुठराघात किया है ।

उच्च शिक्षा संबंधी परीक्षाएं और अनियमितताएं

 

अप्रैल 2015 में, राष्ट्रीय स्तर की इंजीनियरिंग संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मेन, के प्रश्न पत्र लीक करने के आरोप में पांच लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मई 2015 में, बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और पेपर लीक की रिपोर्ट के बाद ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) रद्द कर दिया गया था।

 मई 2016 में, तेलंगाना स्टेट इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर और मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट  पेपर लीक की खबरों से प्रभावित हुआ था, कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि भौतिकी और रसायन विज्ञान के पेपर पहले ही लीक हो चुके थे। 

 

अनियमितताओं को रोकने के लिए किए गए प्रयास

 

ऐसा नहीं है कि अतीत की प्रश्नपत्र लीक होने वाली घटनाओं के सीख नहीं ली गई है । पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के समय नकल रोकने के लिए कपड़ों की बाहें तक कटवाई गई हैं । केरल में छात्राओं को इनर वियर उतारने के लिए  नीट की परीक्षा के दौरान निर्देशित किया गया । अन्य जगहों पर समय समय पर नाक -कानों की परंपरागत बालियां तक उतरवाई गई हैं । सांस्कृतिक और परंपरागत प्रतीकों जैसेेे रक्षा कवच को परीक्षा केंद्रों में कैंची से काट कर कूड़ेदान में फेंका गया है । ऐसे में इन सभी चीजों को सह रहा वास्तविक युवा यही चाहता है कि ढकोसले में न पड़कर वास्तविक रूप से प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परीक्षा को परीक्षा जैसे बनाए रखने का काम हो । उपरोक्त बताए गई वास्तविक घटनाएं कितना नकल रोकने में सक्षम हैं यह सोचनीय विषय है । और यदि उपरोक्त के आधार पर नकल रोकने की हम उम्मीद कर रहे हैं तो हम डिजिटल होते भारत की समझ से काफी दूर हैं ।

भारतीय न्याय संहिता में कठोर नियमनों के प्रावधान के जरिए ऐसे माफियाओं को रोकने के सार्थक प्रयास होने चाहिए । आज वह समय आ गया है कि इस विषय पर जन पटल पर परिचर्चा हो कि परीक्षा केंद्रों को किन आधारों पर संबद्ध किया जाता है ?किन आधारों पर ऐसे  परीक्षाकेंद्र संबद्ध हो जाते हैं जहां अलग कमरे में बैठा के पेपर लीक कराया जाता है ? किन आधारों पर एक राज्य में प्रतिबंधित एजेंसी को दूसरे राज्य में परीक्षा आयोजित करने की अनुमति मिल जाती है ?किन आधारों पर ऐसे परीक्षा केंद्रों को संबद्ध किया जाता है जहां बाहर से परीक्षा देने आए छात्रों के बैग रखने और चिलचिलाती गर्मी में पंखे तक की व्यवस्था नहीं होती ?

किन आधारों पर ऐसे केंद्रों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है जहां स्नातक डिग्री के आधार पर परीक्षा दे रहा छात्र कक्षा 5 में पढ़ने वाले बच्चे के टेबल- कुर्सी में बैठकर परीक्षा देता है ? 2 घंटे की परीक्षा में जहां दशमलव का भी महत्व होता है वहां इन भौतिक कमियों को आज के समय में तो हम दरकिनार कर ही नहीं सकते।

 

इस समय शायद ही कोई उन 23 लाख  बच्चों  की मानसिक  स्थिति का आंकलन कर पाए। आज वह समय आ गया है जब इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के क्रम में उत्तरदाई लोगों  पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो और सीबीआई जांच द्वारा ऐसे कृत्यों के सच को सामने लाया जाए।

 

 

 

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