बुधवार, 24 अगस्त 2016

दस असफल कोशिशों का पुल ...

                      10 असफल कोशिशों का  पुल



1-रूरी नही कि जीवन में बस खुशफहमीयाँ ही हों
   एक तरफ़ा प्यार की ग़लतफ़हमियों का शुरुर अनोखा होता है |

2-बांधे भला कब प्यार टिका है जीवन में
  इस गोरखधंधे में समझदारी देर से आती है |

3-  सही कहा उसने इंसान एक से नही होते
   यादों की दीवार में कुछ ही तो घाव देते हैं ....

4-चाँद का साथ साथ चलना  बस बचपन में होता था
  यहाँ तो चाँद के दीदार को ईदी  तक तरस गयी

5-अब दुनिया में घूंघट लगाने का मतलब बदलेगा
   एक मुद्दत से कोई  वफ़ा नही मिला मुझे

6-यूँ कितनी  बेबस होती है जिंदगी इंसा की ...
   चंद खोटे  सिक्के भी साथ छोड़ देते हैं...

7-कभी इधर घूमकर तो कभी उधर घूमकर जिन्दगी काट दी हमने.
  वो कहते हैं जिन्दगी का फलसफा यूँ अकेले कटता नही

 

8-वो नस बस दब चुकी थी ढाल लिया था उसने खुद को वैसे  ही
तुम्हारी आवाज ने उसे फिर  खून से सराबोर कर दिया |


9-कभी कभी तुम्हारे रुखसार  को देखकर दिल कह उठता है
   तू मेरा न था न होगा कभी ..फिर क्यों सरेआम तमाशा करना मोहब्बत का ..


10-आज फिर देखा तुमको  झाँकते हुए अपने सपने में  दरवाजे से ...        
      कह देती तो खोल दिया होता दरवाजा ....आखिर सपना ही तो था

                                                                                                                   

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